Post – 2018-01-13

आत्मवंचना के रूप

हम एक ऐसे दौर से गुजर रहे हैं जो बहुतों की नजर में बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे बाहर निकलने के जो तरीके अपनाये जा रहे हैं वे अधिक दुर्भाग्यपूर्ण है। विचार का स्थान घबराहट ने ले लिया है। बहस गालियों के आदान प्रदान का रूप ले चुकी है। अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता पर की जिन्हें चिन्ता है उनका हाल यह कि वे अपनी बद्धमूल धारणाओं से असहमति को सहन नहीं कर पाते। वे उसका दमन करने के लिए उनके पास जो सबसे कठोर तरीका अपनाते और गर्हित भाषा का प्रयोग करते हैं। एसे लोगों को क्या जिसके पास राजशक्ति है, वह अपने से असहमत लोगों के विरुद्ध दंडात्मक तरीका अपनाए तो उसे अनुचित कहने का नेतिक अधिकार अधिकार उनके पास है? अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की मांग संयत भाषा और तार्किक रूप में ही की जा सकती है।

२. भारतीय जनता पार्टी का शासन निर्दोष नहीं है, यह पिछले शासनों से कम दोषपूर्ण है। कोई भी शासन निर्दोष नहीं होता। इसके जिन दोषों को गिनाया जाता है वे इसे उत्तराधिकार में मिले हैं। भ्रष्टाचार

Post – 2018-01-12

जज साहब आपको तकलीफ क्या है?

जिन मामलों में हमारी सेटिंग हो चुकी है उन्हें मांगने पर भी हमें नहीं देते।

Post – 2018-01-12

जज साहब आपको तकलीफ क्या है?

जिन मामलों में हमारी सेटिंग हो चुकी है उन्हें मांगने पर भी हमें नहीं देते।

Post – 2018-01-12

जज साहब आपको तकलीफ क्या है?

जिन मामलों में हमारी सेटिंग हो चुकी है उन्हें मांगने पर भी हमें नहीं देते।

Post – 2018-01-12

बौद्धिक लकड़बग्घे (3)

‘एक भरोसो एक बल एक आस बिस्वास
हुलसी मोदी जदि हटे निसि-दिन होय प्रकास’

– पर हटे कैसे यह लकड़बग्घ बुद्धि की समझ में नहीं आता । करें क्या।

– करना तो कुछ होगा, बिना कुछ किए तो हटने वाला नहीे। सोचो, सतह पर उपाय नहीं सूझता तो जमीन में धंस कर सोचो।

– जमीन में तो धंस ही चुके है, ऊपर से मिट्टी पड़ना ही बाकी है।

– फिर ऐसा करो कि देश को ही तोड़ दो। न रहेगा देश न रहेगा उसका राज। जब उसका नहीं रह जाएगा तब हमारा अपने आप हो जाएगा।

– पर हममें से किसका, या किसके हिस्से में कौन सा टुकड़ा यह तो तय करो।

– वह बाद में तय कर लेंगे, या जिसके हाथ जो लगा वह उसका। पहले तोड़ो फिर बांटेंगे।

– पर टूटेंगा कैसे। सभी तो डरे हुए हैं। सभी असुरक्षित हैं। दुनिया को पता है भारत में तानाशीही हे, जबान खोलते ही गोली मार दी राती हे।

– जिन देशों को यह मालूम हे उनकी मदद लेंगे, जिन देशों की भारत से दुश्मनी है उनकी मदद लेंगे, जो भारत को तोड़ कर अपने में जोड़ना चाहते हैं उनका साथ देंगे। तोड़ना भारत को है तो भारत को तोड़ने वाले सभी हमारे दोस्त हे. दुश्मन का दुश्मन अपना दोस्त होता है। वह भीतर हो या बाहर, संसद में हो या सड़क पर, न्यायालय में यक अन्यायालय में. तोड़ने के लिए जुड़़ो, जोड़ने वालेो को तोड़ो। समय आ गया हे, सेकुलरिज्म को बचाने के लिए देश की बलि देनी होगी।

– बात तो समझ में आती हे, यार।

Post – 2018-01-12

बौद्धिक लकड़बग्घे (3)

‘एक भरोसो एक बल एक आस बिस्वास
हुलसी मोदी जदि हटे निसि-दिन होय प्रकास’

– पर हटे कैसे यह लकड़बग्घ बुद्धि की समझ में नहीं आता । करें क्या।

– करना तो कुछ होगा, बिना कुछ किए तो हटने वाला नहीे। सोचो, सतह पर उपाय नहीं सूझता तो जमीन में धंस कर सोचो।

– जमीन में तो धंस ही चुके है, ऊपर से मिट्टी पड़ना ही बाकी है।

– फिर ऐसा करो कि देश को ही तोड़ दो। न रहेगा देश न रहेगा उसका राज। जब उसका नहीं रह जाएगा तब हमारा अपने आप हो जाएगा।

– पर हममें से किसका, या किसके हिस्से में कौन सा टुकड़ा यह तो तय करो।

– वह बाद में तय कर लेंगे, या जिसके हाथ जो लगा वह उसका। पहले तोड़ो फिर बांटेंगे।

– पर टूटेंगा कैसे। सभी तो डरे हुए हैं। सभी असुरक्षित हैं। दुनिया को पता है भारत में तानाशीही हे, जबान खोलते ही गोली मार दी राती हे।

– जिन देशों को यह मालूम हे उनकी मदद लेंगे, जिन देशों की भारत से दुश्मनी है उनकी मदद लेंगे, जो भारत को तोड़ कर अपने में जोड़ना चाहते हैं उनका साथ देंगे। तोड़ना भारत को है तो भारत को तोड़ने वाले सभी हमारे दोस्त हे. दुश्मन का दुश्मन अपना दोस्त होता है। वह भीतर हो या बाहर, संसद में हो या सड़क पर, न्यायालय में यक अन्यायालय में. तोड़ने के लिए जुड़़ो, जोड़ने वालेो को तोड़ो। समय आ गया हे, सेकुलरिज्म को बचाने के लिए देश की बलि देनी होगी।

– बात तो समझ में आती हे, यार।

Post – 2018-01-12

बौद्धिक लकड़बग्घे (3)

‘एक भरोसो एक बल एक आस बिस्वास
हुलसी मोदी जदि हटे निसि-दिन होय प्रकास’

– पर हटे कैसे यह लकड़बग्घ बुद्धि की समझ में नहीं आता । करें क्या।

– करना तो कुछ होगा, बिना कुछ किए तो हटने वाला नहीे। सोचो, सतह पर उपाय नहीं सूझता तो जमीन में धंस कर सोचो।

– जमीन में तो धंस ही चुके है, ऊपर से मिट्टी पड़ना ही बाकी है।

– फिर ऐसा करो कि देश को ही तोड़ दो। न रहेगा देश न रहेगा उसका राज। जब उसका नहीं रह जाएगा तब हमारा अपने आप हो जाएगा।

– पर हममें से किसका, या किसके हिस्से में कौन सा टुकड़ा यह तो तय करो।

– वह बाद में तय कर लेंगे, या जिसके हाथ जो लगा वह उसका। पहले तोड़ो फिर बांटेंगे।

– पर टूटेंगा कैसे। सभी तो डरे हुए हैं। सभी असुरक्षित हैं। दुनिया को पता है भारत में तानाशीही हे, जबान खोलते ही गोली मार दी राती हे।

– जिन देशों को यह मालूम हे उनकी मदद लेंगे, जिन देशों की भारत से दुश्मनी है उनकी मदद लेंगे, जो भारत को तोड़ कर अपने में जोड़ना चाहते हैं उनका साथ देंगे। तोड़ना भारत को है तो भारत को तोड़ने वाले सभी हमारे दोस्त हे. दुश्मन का दुश्मन अपना दोस्त होता है। वह भीतर हो या बाहर, संसद में हो या सड़क पर, न्यायालय में यक अन्यायालय में. तोड़ने के लिए जुड़़ो, जोड़ने वालेो को तोड़ो। समय आ गया हे, सेकुलरिज्म को बचाने के लिए देश की बलि देनी होगी।

– बात तो समझ में आती हे, यार।

Post – 2018-01-12

फटे चिथड़े पड़े हैं
कल के परचम और नारे अब
नये सुर में नया कुछ कह
नया अंदाज पैदा कर ।

Post – 2018-01-12

फटे चिथड़े पड़े हैं
कल के परचम और नारे अब
नये सुर में नया कुछ कह
नया अंदाज पैदा कर ।

Post – 2018-01-12

फटे चिथड़े पड़े हैं
कल के परचम और नारे अब
नये सुर में नया कुछ कह
नया अंदाज पैदा कर ।