जो भी लिखता है लहू में डुबो के लिखता है
कलम मिली न मिली उंगलियां तो हाजिर हैं।
आसमानों में खींचता है कई बार लकीर
हो घटाटोप अगर बिजलियां तो हाजिर हैं।
जो भी लिखता है लहू में डुबो के लिखता है
कलम मिली न मिली उंगलियां तो हाजिर हैं।
आसमानों में खींचता है कई बार लकीर
हो घटाटोप अगर बिजलियां तो हाजिर हैं।